Zulmat Kade Mein Mere Lyrics-Jagjit Singh, Mirza Ghalib

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Title – ज़ुल्मत कदे में मेरे Lyrics
Movie/Album- मिर्ज़ा ग़ालिब -टी वी सीरियल -1988
Music By- जगजीत सिंह
Lyrics- मिर्ज़ा ग़ालिब
Singer(s)- जगजीत सिंह

ज़ुल्मत-कदे में मेरे, शब-ए-ग़म का जोश है
इक शम’आ है दलील-ए-सहर, सो ख़मोश है

ने मुज़्दा-ए-विसाल ना नज़्ज़ारा-ए-जमाल
मुद्दत हुई कि आश्ती-ए-चश्म-ओ-गोश है

दाग़-ए-फ़िराक़-ए-सोहबत-ए-शब की जली हुई
इक शम’आ रह गई है, सो वो भी खामोश है
ज़ुल्मत-कदे में मेरे…

आते हैं ग़ैब से, ये मज़ामीं ख़याल में
ग़ालिब, सरीर-ए-ख़ामा नवा-ए-सरोश है
ज़ुल्मत-कदे में मेरे…

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