Kabir Das ji ke Dohe, Balpan bhole gaya

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बालपन भोले गया, और जुवा महमंत |
वृद्धपने आलस गयो, चला जरन्ते अन्त ||

व्याख्या:

बालपन तो भोलेपन में बीत गया, और जवानी मदमस्ती में बीत गयी | बुढ़ापा आलस्य में खो गया, अब अन्त में चिता पर जलने के लिये चला |

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