Kabir Das ji ke Dohe, beta jaye kya hua

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बेटा जाये क्या हुआ, कहा बजावे थाल |
आवन जावन होय रहा, ज्यों कीड़ी का नाल ||

व्याख्या:

तेरे पुत्र का जन्म हुआ है, तो क्या बहुत अच्छा हुआ है ? और प्रसंता में तू क्या थाली बजा रहा है ? ये तो चींटियों को पंक्ति के समान जीवों का आना जाना लगा है |

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