Kabir Das ji ke Dohe, Bhakti jo sidhi mukti ki

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भक्ति जो सीढ़ी मुक्ति की, चढ़ै भक्त हरषाय |
और न कोई चढ़ि सकै, निज मन समझो आय ||

भावार्थ:

व्याख्या:
भक्ति मुक्ति की सीडी है, इसलिए भक्तजन खुशी – खुशी उसपर चदते हैं | आकर अपने मन में समझो, दूसरा कोई इस भक्ति सीडी पर नहीं चढ़ सकता | (सत्य की खोज ही भक्ति है)

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