Kabir Das ji ke Dohe, Ek Shabd Sukh Khani Hai

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एक शब्द सुख खानि है, एक शब्द दुःखराखि है |
एक शब्द बन्धन कटे, एक शब्द गल फंसि ||

व्याख्या:

समता के शब्द सुख की खान है, और विषमता के शब्द दुखो की ढेरी है | निर्णय के शब्दो से विषय – बन्धन कटते हैं, और मोह – माया के शब्द गले की फांसी हो जाते हैं |

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