Kabir Das ji ke Dohe, gyani abhimani nahi

  • Post comments:0 Comments

ज्ञानी अभिमानी नहीं, सब काहू सो हेत |
सत्यवान परमारथी, आदर भाव सहेत ||

व्याख्या:

ज्ञान से पूर्ण, अभिमान से रहित, सबसे हिल मिलकर रहने वाले, सत्येनिष्ठ परमार्थ – प्रेमी एवं प्रेमरहित सबका आदर – भाव करने वाले |

Leave a Reply