Kabir Das ji ke Dohe, Harijan soi janiye

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हरिजन सोई जानिये, जिहा कहैं न मार |
आठ पहर चितवर रहै, गुरु का ज्ञान विचार ||

व्याख्या:

हरि – जन उसी को जानो जो अपनी जीभ से भी नहीं कहता कि “मारो” | बल्कि आठों पहर गुरु के ज्ञान – विचार ही में मन रखता है |

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