Kabir Das ji ke Dohe, kabeer mandir aapne

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कबीर मन्दिर आपने, नित उठि करता आल |
मरहट देखी डरपता, चौड़े दीया डाल ||

व्याख्या:

नित्ये उठकर जो आपने मन्दिर में आनंद करते थे, और श्मशान देखकर डरते थे, वे आज मैदान में उत्तर – दक्षिण करके डाल दिये गये |

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