Kabir Das ji ke Dohe,

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सुख – दुःख सिर ऊपर सहै, कबहु न छाडै संग |
रंग न लागै और का, व्यापै सतगुरु रंग ||

व्याख्या:

सभी सुख – दुःख अपने सिर ऊपर सह ले, सतगुरु – सन्तो की संगर कभी न छोड़े | किसी ओर विषये या कुसंगति में मन न लगने दे, सतगुरु के चरणों में या उनके ज्ञान – आचरण के प्रेम में ही दुबे रहें |

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