गरीबदास का शून्य | अशोक चक्रधर की कविता पर टेलीप्ले | Hasya Kavita Ghareebdas | Ashok Chakradhar

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भ्रष्टाचारी लोग अच्छे-अच्छों के कान काट लेते हैं. भैंस के कान तो कट ही गए!!!
‘गरीबदास का शून्य’ डॉ. अशोक चक्रधर की एक प्रसिद्ध और तीस वर्ष पुरानी कविता है. यह उसी का फ़िल्मांतरण है. आप पाएंगे कि कविता आज भी प्रासंगिक है.
इस टेलीप्ले का निर्देशन श्री मुकेश शर्मा ने किया है.
पात्र
गरीबदास
गरीबदास का साला
मुस्तंडा-1
मुस्तंडा-2

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