‘छ: साल की छोकरी के बहाने, कविता शिक्षण के मायने’

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कविता साहित्य की सबसे पुरानी विधा है और बच्चे की भाषिक क्षमता बढ़ाने के लिए कविताओं से उसकी दोस्ती बनी रहे यह बहुत जरूरी है । आजकल ‘छः साल की छोकरी’ को लेकर चर्चा का दौर शुरू हो चुका है जिसमें अपने-अपने विचारों और तर्कों के साथ शिक्षा से सरोकार रखने वाले विद्वान जन अपने पक्षों को रख रहे हैं | वर्तमान में इस विषय की गहराई में जाकर पड़ताल करने की जरुरत महसूस की जा रही हैं जिससे सही तथ्य उभरकर आ पायें | अच्छे बाल साहित्य, कविता शिक्षण के मायने, कक्षाओं में इसे बरतने और कविताओं के अन्य पहलूओं पर विमर्श करने के लिए हमारे साथ मनोज कुमार जी (अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बैंगलोर), नंदकिशोर हटवाल जी (SCERT देहरादून, उत्तराखंड) और रेखा चमोली जी (रा.प्रा.वि. गणेशपु���, उत्तरकाशी) यूट्यूब पर हमारे साथ लाइव जुड़ रहे हैं |
‘छ: साल की छोकरी के बहाने, कविता शिक्षण के मायने’
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