हिंदी कविता: अबकी बार लौटा तो: कुँवर नारायण: Abki Baar Lauta: Kunwar Narayan: Inspiration Humanity

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मनुष्यता का पाठ ही मनुष्य जीवन को पूर्ण कर सकता है। कविता में जीवन में पुनः लौटने की कामना करता है। वह लौटता ही नहीं बल्कि पहले से बेहतर बनकर लौटता है। मात्र बृहत्तर ही नहीं वह मनुष्यतर हो कर लौटता है। सबके हित की सोचता है, वह कृतज्ञतर हो कर लौटता है। कवी के अनुसार जीवन की सफलता डरावने पशु – दानव या पिद्दी सा जानवर बने रहने में नहीं, जीवन की सार्थकता सबके हिताहित की सोचते हुए मनुष्य बनकर जीने में है।

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Poetry: Kunwar Narayan
Voice: #Voysuhz
Music: Constancy Part 3 – The Descent by Kevin MacLeod is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 license. https://creativecommons.org/licenses/…

Source: http://incompetech.com/music/royaltyf…

Artist: http://incompetech.com/

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अबकी बार लौटा तो
कुँवर नारायण

अबकी बार लौटा तो बृहत्तर लौटूंगा
चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं
कमर में बांधें लोहे की पूँछे नहीं

जगह दूंगा साथ चल रहे लोगों को
तरेर कर न देखूंगा उन्हें
भूखी शेर-आँखों से

अबकी बार लौटा तो
मनुष्यतर लौटूंगा

घर से निकलते
सड़को पर चलते
बसों पर चढ़ते
ट्रेनें पकड़ते
जगह बेजगह कुचला पड़ा
पिद्दी-सा जानवर नहीं

अगर बचा रहा तो
कृतज्ञतर लौटूंगा
अबकी बार लौटा तो
हताहत नहीं
सबके हिताहित को सोचता
पूर्णतर लौटूंगा

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